Ek majdur ki kahani!!

एक मजदूर  की काहनी! 
मोहन रावत द्वारा
  
प्रणाम,
       मै  आपको गांव मे रहने वाले जुगल की कहानी  
सुनाने जा रहा हु| जो की आंवला  (म.प्र।) भारत का  निवासी  है | जुगल अविवाहित है| वह दिल का सच्चा और नैक लड़का है| जो की बहुत मेहनती और कुशल भी है | जुगल मजदुरी करता और खुद के घर का पालन और देखभाल भी | मै आपके सामने उसकी सच्ची घाटना लेकर आया हूँ | 
             जुगल रोज के जेसे मजदुरी के लिए संतोष के साथ राम के घर जाता है और वही काम करता है |सुबह से दुपहर तक तो सही से काम चलता है फिर अचानक दुपहर के वकत काम करते-करते जुगल का पैंट फट जाता है | जो की सब के सामने हसीं का पात्र बन जाता  है| जिसे देख सभी काम करने वाले हसते है और उसका मज़ाक बनाते है|इसके कारण वह भी शर्म के कारण लज़्ज़ित महसूस करता है और  फिर वो मकान मालिक से सुई -धागा मांग कर पैंट को सीलता है और वापस से काम पर लग जाता है |
                   अचानक वहाँ पर कही से नाग-नागिन आ जाते है जो की घर के लोगो मे भय पैदा कर देते है लोग घबरा कर इधर से उधर भाग रहे होते है| यह बात जुगल को पता चलते ही जुगल वहाँ आता है और उन्हें देख कर एक समय के लिए वो भी डर जाता है | वह अपने आप को सँभालते हुए, अपने विवेक से काम लेते  हुए, लोगो को भागने से रोकता है और सभी लोगो को एक जगह इक्कठा कर देता है |वही नाग-नागिन भी इन्हे देख कर भयभीत हो जाते है |जुगल वहा पर नाग-नागिन के लिए रास्ता बना कर उन्हें निकाल देता है और लोग वहा पर शांति से चैन की सास लेते है और अंत मे लोग उसको धन्यवाद कहते है और उस से माफ़ी मांगते है, उसका मज़ाक बनाने के लिए |शाम को काम खतम  करके फिर दोनो घर चले जाते है |इस नेक कार्य के बाद से, लोग उस से मानभाव के साथ आदर करते जिससे की उसके मन मै भी लोगो के प्रति सम्मान बढ़ गया |इसके बाद से गांव मै भी उसकी तारीफ और बढ गई ओर वो अपने कामों को ओर विवेक भाव से करने लगा|
                        हम सब मे ये जुगल किशोर कही ना कही होना चाहिए । जब लोगो ने उसका मजाक बनाया उसके उपर हसे तो जुगल के पास दो विकल्प थे या तो उन सब से लडाई कर लेता और फिर लज्जित होकर काम छोड घर चला जाता या फिर समस्या का समाधान ढूंढ़ता। समस्याए सभी के जीवन मे होती हे उनसे भागने के बजाय उसका सामना किया|दोस्तों समस्या का सामना  करने का नाम ही तो जीवन हे।इन्सान हो या जानवर जब तक हम उन्हे परेशान या दुखी नही करते वो भी हमे जानबुचकर तकलिफ नही देते हे।

                                                                          

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